(1) आज के समय मे सबसे  ज्यादा कोई चीज़ इस्तेमाल किया जाता है तो है इंटरनेट  आज जानते है सबसे पहले इंटरनेट और कम्प्यूटर कब और कह बना था

कम्प्यूटर और इंटरनेट : दुनिया का पहला कम्प्यूटर 1946 में अमेरिका में बनाया गया था। यह काफी बड़ा था और इसे चलाने के लिए बहुत से लोगों की आवश्यकता होती थी। घर, विद्यालय और कार्यालय में काम आने वाले छोटे कम्प्यूटर, जिन्हें पीसी के नाम से जाना जाता है, 1977 में खोजे गए थे


हालांकि कम्प्यूटर नहीं होता तो इंटरनेट की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। दोनों का ही क्रमिक विकास हुआ। इंटरनेट का सफर 1970 के दशक में विंट सर्फ (Vint Cerf) और बाब काहन (Bob Kanh) ने शुरू किया गया। 1969 में अमेरिकी रक्षा विभाग के एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (APRA) ने संरा अमेरिका के 4 विश्वविद्यालयों के कम्प्यूटरों की नेटवर्किंग करके इंटरनेट 'अप्रानेट' (APRANET) की शुरुआत की। 1972 में इलेक्ट्रॉनिक मेल अथवा ई-मेल की शुरुआत हुई। यह एक क्रांतिकारी शुरुआत थी।


(2) मोबइल का अविष्कार किसने किया था क्या आप जानते है
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(2) कुछ साल पहले अगर हमें कोई संदेश किसी  के पास तक पहुचाने है तो कितने दिन लग जाते थे  अगर हम घर से अगर   कही बाहर है तो अगर किसी लेनदेन का हिसाब किताब करना है तो सामने वाले को
ये बोलते की अभी मैं बाहर हु घर पर आकर हिसाब करलेंगे  आज कौन सा तारीख है ये देखने के लिये हमें कलेंडर को देखना पड़ता था कई बार तो कलेंडर भी घर मे उस साल का नही रहता था लेकिन जबसे  मोबाइल  आया हमारे बीच   सब काम  आसान हो गया है हम करोड़ो अरबो  का हिसाब मिनटों में  कर लेते है  हमारा घंटो का काम मात्र कुछ सेकेंड या कुछ मिनेट में हो जाता है  लेकिन कितनो की रातों की नींद हराम कर दी है मोबाइल ने  अगर आपको ये नही मालूम कि आप जो चीज़ रोज़ इस्तेमाल करते हो और उसे किसने बनाया  आपको नही पता हो तो कितने शर्म की बात है  तो आइए आज जानते है सबसे पहले  मोबाइल  को किसने कब और कहा बनाया था


वायरलेस communication के जनक के बारे में आपको पता नही हो तो आपका मोबाइल फ़ोन रखना बेकार है | 70 के दशक में   मार्टिन कूपर ने पहला handheld मोबाइल फ़ोन बनाया जिसके बाद से संचार के क्षेत्र में एक ऐसी क्रांति आ गयी तो आज तक रुकने का नाम नही ले रही है | आईये आज हम आपको उसी संचार क्षेत्र में क्रांति लाने वाले Martin Cooper मार्टिन कूपर की जीवनी से आपको रूबरू करवाते है |

डा.मार्टिन कूपर Martin Cooper का जन्म 26 दिसम्बर 1928 को संयुक्त राज्य अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ था | Martin Cooper कूपर का बचपन शिकागो में ही बीता और आरम्भिक शिक्षा भी वही हुयी थी | Illinois Institute of Technology से 1957 में उन्होंने Electrical Engineering में मास्टर डिग्री हासिल की थी | उसके पूर्व ही वर्ष 1954 में उन्होंने मोटोरोला में काम करना आरम्भ कर दिया था | यंहा उन्होंने पोर्टेबल वस्तुओ के उत्पादन पर काम आरम्भ कर दिया था |

इसी दौरान उन्होंने शिकागो पुलिस के लिए एक पोर्टेबल दस्ती पुलिस रेडियो बनाया और सन 1967 में पुलिस विभाग को सौंप दिया | इसके बाद उन्होंने मोटोरोला की सेलुलर रिसर्च को आगे बढ़ाया |3 अप्रैल 1937 को उन्होंने पहला सेलफोन बनाया और इसे बनाने वाले पहले व्यक्ति बन गये | सेलफोन बनाने की प्रेरणा Martin Cooper डा.कूपर को Star Trek टीवी सीरियल से मिली थी ,जिसमे हाथ में पकड़ी डिवाइस से बातचीत करते दिखाया गया था |

अपने सेलफोन बनाने के बाद Martin Cooper डा.कूपर ने उसके अनेक टेस्ट किये और लोगो की उस मान्यता को तोड़ दिया कि फ़ोन केवल लैंडलाइन से ही किये जा सकते है |मजे की बात यह रही कि उन्होंने अपने सेलफोन से पहली काल अपने प्रतिद्वंदी जोएल एंजेल से की , जो AT&T Bell Labs में काम करता था | जब जोएल ने अपना लैंडलाइन फ़ोन उठाया तो कूपर ने कहा कि वो अपने पोर्टेबल फ़ोन से बात कर रहे है | यह फ़ोन 850 ग्राम वजनी था और ऐसा लगता था मानो ईंट उठा रखी हो | सन 1983 में मोटोरोला ने डायनाटेक फोन बनाये , जो पहले से आधे वजनी थे |

इनकी कीमत 3500 डॉलर थी | इसके बाद सेलफोन और हल्के -सस्ते  होते गये |
सन 1983 में Martin Cooper डा.कूपर ने मोटोरोला कम्पनी छोड़ दी और एक नई कम्पनी बनाई , जो सेलुलर इंडस्ट्री के लिए सॉफ्टवेर और बिलिंग सिस्टम तैयार करती थी | इस फर्म को बेचने के पश्चात 1986 में उन्होंने एरेकोम कम्पनी खडी करनी आरम्भ की ,जो सन 1992 में आरम्भ हुयी | इससे वे “स्मार्ट एंटेना ” और तेज ब्रॉडबैंड प्रोधोगिकी पर काम करने लगे ,जो सेलफोन उपभोक्ताओं को सस्ती और तेज इन्टरनेट सेवा उपलब्ध कराती थी |

कम्पनी में उनकी पत्नी एरलेज हैरिस भी सहयोगी थी , जो स्वयं स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से निकली इंजिनियर थी | सन 2003 में एरेकोम ने एक ब्रॉडबैंड वायरलेस सिस्टम iBurst विकसित किया , जिसका ऑस्ट्रेलिया के कई भागो में आज भी सफलतापूर्वक उपयोग किया जाता है | Martin Cooper डा.कूपर का सपना था कि सेलफोन पर जैसे बाते की जा सकती है वैसे ही सबको तेज और सस्ती इन्टरनेट सुविधा उपलब्ध हो | इसके लिए वो तेज ब्रॉडबैंड लेकर आये और उनकी कम्पनी एरेकोम अज भी इस दिशा में ओर तेजी लाने के लिए सक्रियता से जुटी हुयी है |


(3) क्या आप जानते है मोटरसाइकल  बाइक का अविष्कार किसने किया था



(3)मोटरसाइकिल  को मोटरबाइक या बाइक भी कहते हैं क्योंकि मोटरसाइकल मोटर से चलने वाली साइकिल है और इसे साइकिल के डिजाइन को देख कर ही बनाया गया था और आज मोटरसाइकिल इतनी पोपुलर हो चुकी है की लगभग सभी  घरो में एक बाइक मिल ही जाएगी जिस तरह पहले साइकिल का इस्तेमाल किया जाता था उसी तरह आज मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किया जा रहा है लोगो के पास समय की कमी हो  गेई और दिनभर के बहुत से काम के लिए इधर उधर जाना पड़ता है तो समय की बचत और जल्दी काम करने के लिए मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किया जाता है और दिनभर  इसकी मांग बढती जा रही है  आइये जानते है मोटरसाइकिल को  सबसे पहले   कब और कहा बनाया गया था

दोस्तो अविष्कारक का नाम अंग्रेजी में है इसके लिये हमे खेद है क्योंकि अगर आपको इनके बारे विस्तार से जानकारी  चाहिए रहेगे तो आप आसानी से स्पेलिंग के साथ गूगल पे सर्च कर के  आप खोज सकते है

First Motorcycle  या दुनिया की पहली motorcycle को Gottlieb Daimler और Wilhelm Maybach ने Germany में 1985 में बनाया.
इस   s को बहुत ज्यादा पसंद किया जाने लगा और बनाने में ज्यादा भागिदार होने के कारण Daimler को ही the father of the motorcycle यानि Motorcycle का जन्मदाता कहा जाने लगा
Gottlieb Daimler और Wilhelm Maybach के द्वारा बनाई गई पहली motorcycle की Top Speed 11 km/h थी और इसमें 264 cc का Four Stroke Engine लगाया था जिसमे Air cooling System था इसमें Brake shoe brake थे जो अभी Cycle में ही होते है दुनिया की पहली Motor Cycle में कोई भी Suspension System जैसे Shock absorb-er नहीं थे इसमें लकड़ी का use हुआ था

इसके टायर  लकड़ी के थे जिन पर लोहे की रिंग थी जैसे अभी बैल गाड़ी में होती है इसका वजन 90 kg था

 ये Motorcycle की खोज तो कमाल की थी हमेशा नया सोचने वाले ही अपने आप को याद रखने का Reason देते है


(4) क्या आप जानते है साइकिल का अविष्कार किसने किया था
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(4)1839 में स्कॉटलैंड के एक लुहार किर्कपैट्रिक मैकमिलनद्वारा आधुनिक सायकिल का आविष्कार होने से पूर्व यह अस्तित्व में तो थी पर इस पर बैठकर जमीन को पांव से पीछे की ओर धकेलकर आगे की तरफ़ बढ़ा जाता था। मैकमिलन ने इसमें पहिये को पैरों से चला सकने योग्य व्यवस्था की।

ऐसा माना जाता है कि 1817 में जर्मनी के बैरन फ़ॉन ड्रेविसने साइकिल की रूपरेखा तैयार की। यह लकड़ी की बनी सायकिल थी तथा इसका नाम ड्रेसियेन रखा गया था। उस समय इस सायकिल की गति 15 किलो मीटर प्रति घंटा थी।[1] इसका अल्प प्रयोग 1830 से 1842 के बीच हुआ था।

इसके बाद मैकमिलन ने बिना पैरों से घसीटे चलाये जा सकने वाले यंत्र की खोज की जिसे उन्होंने वेलोसिपीड का नाम दिया था। पर अब ऐसा माना जाने लगा है कि इससे बहुत पूर्व 1763 में ही फ्रांस के पियरे लैलमेंट ने इसकी खोज की थी।


यूरोपीय देशों में बाइसिकिल के प्रयोग का विचार लोगों के दिमाग में 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ही आ चुका था, लेकिन इसे मूर्तरूप सर्वप्रथम सन् 1816 में पेरिस के एक कारीगर ने दिया। उस यंत्र को हॉबी हॉर्स, अर्थात काठ का घोड़ा, कहते थे। पैर से घुमाए जानेवाले क्रैंकों (पैडल) युक्त पहिए का आविष्कार सन् 1865 ई. में पैरिस निवासी लालेमें (Lallement) ने किया। इस यंत्र को वेलॉसिपीड (velociped) कहते थे। इसपर चढ़नेवाले को बेहद थकावट हो जाती थी। अत: इसे हाड़तोड (bone shaker) भी कहने लगे। इसकी सवारी, लोकप्रिय हो जाने के कारण, इसकी बढ़ती माँग को देखकर इंग्लैंड, फ्रांस और अमेरिका के यंत्रनिर्माताओं ने इसमें अनेक महत्वपूर्ण सुधार कर सन् 1872 में एक सुंदर रूप दे दिया, जिसमें लोहे की पतली पट्टी के तानयुक्त पहिए लगाए गए थे। इसमें आगे का पहिया 30 इंच से लेकर 64 इंच व्यास तक और पीछे का पहिया लगभग 12 इंच व्यास का होता था। इसमें क्रैंकों के अतिरिक्त गोली के वेयरिंग और ब्रेक भी लगाए गए थे।

भारत में भी साइकिल के पहियों ने आर्थिक तरक्की में अहम भूमिका निभाई। 1947 में आजादी के बाद अगले कई दशक तक देश में साइकिल यातायात व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा रही। खासतौर पर 1960 से लेकर 1990 तक भारत में ज्यादातर परिवारों के पास साइकिल थी। यह व्यक्तिगत यातायात का सबसे ताकतवर और किफायती साधन था। गांवों में किसान साप्ताहिक मंडियों तक सब्जी और दूसरी फसलों को साइकिल से ही ले जाते थे। दूध की सप्लाई गांवों से पास से कस्बाई बाजारों तक साइकिल के जरिये ही होती थी। डाक विभाग का तो पूरा तंत्र ही साइकिल के बूते चलता था। आज भी पोस्टमैन साइकिल से चिट्ठियां बांटते हैं।

जमाना बदला और कूरियर सेवाएं ज्यादा भरोसेमंद बन गईं, लेकिन साइकिल की अहमियत यहां भी खत्म नहीं हुई। बड़ी संख्या में कूरियर बाँटने वाले भी साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। 1990 में देश में उदारीकरण की शुरुआत हुई और तेज आर्थिक बदलाव का सिलसिला शुरू हुआ। देश की युवा पीढ़ी को मोटरसाइकिल की सवारी ज्यादा भा रही थी। लाइसेंस परमिट राज में स्कूटर के लिए सालों इंतजार करने वालों का धैर्य चुक गया था। उदारीकरण के कुछ साल बाद शहरी मध्यवर्ग को अपने शौक पूरे करने के लिए पैसा खर्च करने में हिचक नहीं थी। शहरों में मोटरसाइकिल का शौक बढ़ रहा था। गांवों में भी इस मामले में बदलाव की शुरुआत हो चुकी थी। राजदूत, बुलेट और बजाज समूह के स्कूटर नए भारत में पीछे छूट रहे थे। हीरो होंडा देश की नई धड़कन बन रही थी। यह बदलाव आने वाले सालों में और तेज हुआ। देश में बदलाव के दोनों पहिये बदल गए थे। इसके बावजूद भारत में साइकिल की अहमियत खत्म नहीं हुई है। शायद यही वजह है कि चीन के बाद दुनिया में आज भी सबसे ज्यादा साइकिल भारत में बनती है



(5) क्या आप जानते है टीवी का अविष्कार किसने किया था

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(5)दोस्तो  हम tv के सामने रोज़ घंटो बैठकर टाइम बिताते हैं  क्या आपने कभी ये सोचा  कि इसको किसने बनाया होगा  उसको tv बनाने का आइडिया कहा से आया होगा  ये एक बहुमूल्य खोज है जब टेलीविज़न बाजार में नया नया आया था तो इसे लेने के लिए लंबी लंबी लिइने होती थी  उस समय बहुत कम घरो में टेलीविजन देखने को मिलते थे लिकिन आज तो लगभग हर घर घर  में आप को टेलीविज़न असानी से देखने को मिलजएगा   टेक्नोलॉजी की दुनिया मे tv काफी लोकप्रिय उपकरण है  तकनॉलाजी की अन्य उपकरण के साथ टेलीविजन में अधिक बदलाव आए है पहले के समय मे जहा हमे बड़े डब्बे जैसे  आकार के tv देखने को  मिलते थे आज उनकी जगह एलसीडी और LED tv ने लेली है जो उसके आधुनिक रूप मने जाते है



टीवी का अविष्कार  किसने कहा और कब किया था


आप को बता दे आज के समय मे tv को LCD और LED TV के रूप में देख रहे है और हमे उम्मीद है कि भविष्य में और अच्छी तकनोलॉजी देखने को मिल सकती है आप को बता दे टीवी का अविष्कार  जॉन लोगी बेयर्ड ने साल 1925 में  लंदन में किया था इस महान अविष्कार के बाद पहला वर्किंग टेलीविज़न का निर्माण साल 1927 में फीलो फोन्सवर्थ द्वारा किया गया था इसे बनाने के बाद फीलो फोनस्वर्थ ने 1 सितंबर 1928 को प्रेस के सामने पेस किया था लोगों को ये कोई अजूबे से कम नही लग रहा था क्योकि लोग इसमे आवाज़ के साथ चलचित्र देख सकते थे

पहला टीवी  ब्लैक एंड वाइट था लिकिन सिर्फ तीन साल बाद  बेयर्ड ने  1925 के बाद तीन साल बाद  साल 1928 में कलर टीवी का निर्माण किया
हालांकि इसे अपनाने में लोगो को  कई साल लग गए  थे साल 1940 में पहली बार पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग की गई थीं साल 1960  आते आते लोगो ने टीवी खरीदना आरम्भ कर दिया था इसलिए
टीवी लोगों में काफी लोकप्रिय हो गया था  अगर भारत की बात करे तो भारत मे पहली बार टीवी को कोलकाता के एक धनी आदमी ने प्रयोग किया था जिसका नाम नियोगि था  इसके साथ सीधा प्रसारण  दिल्ली से 15 सितंबर  साल 1959 में  किया गया था