कोरोना वायरस -ऐसे कई  विश्वमहामारी आ चुका है


कोरोना वायरस- covid-19                                             

   कोरोना वायरस पूरी दुनिया मे हाहाकर  मचा रखा है  अभी तक पूरी दुनिया को अपने सामने  घुटने के बल चलने पर मजबूर कर दिया है करीब ऑक्टोबर नवम्बर से ये चीन के वुहान शहर से निकलकर पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले लिया  covid19  कोरोना वायरस ने वही  ज्यादा  तबाही मचा रखा है दुनिया में जो ज्यादा शक्ति शाली देश है वही ज्यादा लोग इसके शिकार हुए है अमेरिका जैसे ताकतवर देश भी  कुछ नही कर पाया  हालांकि  अभी तक कोरोना  वायरस  से सबसे ज्यादा मारने वाले है मारने वाला की संख्या लाखो में हो गयी है  15 लाख लोग संक्रमित हुए थे।

हिंदुस्तान में भी करीब( 1,65779)से ज्यादा लोग संक्रमित हुए है ( 4,706) हजार लोगों की जान जा चुकी है 
ये डेटा 30/5/2020 तक का है अभी कितने लोग इसके चपेट में आएंगे ये तो समय बताएगा  इंडिया में सबसे ज्यादा covid19 से  संक्रमित मुम्बई में हुए करीब( 61000) हजार
और (2000 ), लोगो की जान जा चुकी है और (2000) लोग ठीक हुए है

प्लेग विश्वमहामारी  को स्पेनिश फ्लू के नाम से भी जाना जाता है जिसमे करीब साढ़े चार करोड से पांच करोड़ के बीच जान गई थी 

प्राचीन काल में किसी भी महामारी को प्लेग कहते थे। यह रोग कितना पुराना है इसका अंदाजा इसीसे  जा सकता है कि एफीरस के रूफुस ने, जो ट्रॉजन युग का चिकित्सक था, "प्लेग के ब्यूबो का जिक्र किया है और लिखा है कि है। ईसा पूर्व युग में 41 महामारियों के लेख मिलते हैं।प्रोफेट ईसा के समय से सन् 1500 तक 109 बढ़ी महामारियाँ हुईं, जिनमें चौदवीं शताब्दी की ब्लैक डेथ प्रसिद्ध है। सन् 1500 से 1720 तक विश्वविख्यात महामारियाँ (epidemics) फैलीं। फिर 18वीं और 19वीं शताब्दी में शांति रही। सिर्फ एशिया में छिटफुट आक्रमण होते रहे। तब सन् 1894 में हांगकांग में इसने सिर उठाया और जापान, भारत, तुर्की होते हुए सन् 1896 में यह रोग रूस जा पहुँचा, सन् 1898 में अरब, फारस, ऑस्ट्रिया, अफ्रीका, दक्षिणी अमरीका,और सन 1900 में इंग्लैंड, अमरीका और ऑस्ट्रेलिया में इसने कोहराम मचा दिया सन् 1898 से 1918 तक भारत में इसने एक करोड़ लोगो की बलि ली। अब पुन: संसार में शांति है, केवल छिटपुट आक्रमण के समाचार आते रहे है
सातवीं शताब्दी में 664 से 680 तक फैली महामारियाँ, जिनका उल्लेख बेडे ने किया है, शायद प्लेग ही थी। 
प्लेग के स्थायी गढ़ मेसोपोटामिया, अरब कुमाऊँ, हूनान (चीन) पूर्वी तथा मध्य अफ्रीका हैं। प्लेग की महामारियों की कहानी विश्व इतिहास के साथ पढ़ने पर ज्ञात होती है कि इतिहास की धाराएँ मोड़ने में इस रोग ने कितना बड़ा भाग लिया है।

चेचक ने भी कुछ कम लोगो के प्राण नही लिए


चेचक को माता के नाम से भी जाना जाता है  लोगो का यह भी मानना है  कि अगर किसी व्यक्ति को चेचक निकल जाए तो अगर वो मासाहारी  भोजन से बचे तो इस बीमारी से जल्दी मुक्ति पा सकता है

यह रोग अत्यंत प्राचीन है। आयुर्वेद के ग्रंथों में इसका वर्णन मिलता है। मिस्र में १,२०० वर्ष ईसा पूर्व की एक ममी mummy में पाई गई थी, जिसकी त्वचा पर चेचक के समान विस्फोट उपस्थित थे। विद्वानों ने इसे चेचेक माना। चीन में भी ईसा के पूर्व इस रोग का वर्णन पाया जाता है। छठी शताब्दी में यह रोग यूरोप में पहुँचा और १६वीं शताब्दी में स्पेन निवासियों द्वारा अमरीका में पहुच गया। सन्‌ १७१८ में यूरोप मे(inoculation)  को प्रचलित की और सन्‌ १७९६ में जेनर ने इसके टीके का आविष्कार किया। चेचक विषाणु जनित रोग है, इसका प्रसार केवल मनुष्यों में होता है, इसके लिए दो विषाणु उत्तरदायी माने जाते है वायरोला मेजर और वायरोला माइनर १ .2 इस रोग के विषाणु त्वचा की लघु रक्त वाहिका, मुंह, गले में असर दिखाते है, मेजर विषाणु ज्यादा मारक होता है, इसकी म्रत्यु दर ३०-३५% रहती है, इसके चलते ही चेहरे पर दाग, अंधापन जैसी समस्या पैदा होती रही है, माइनर विषाणु से मौत बहुत कम होती है |

हैजा 

नॉर्मली लोग इसे हैजा के नाम से जानते है 
आम बोलचाल मे हैजा,  लोग जिसे एशियाई महामारी के रूप में भी जाना जाता है एक संक्रामक आंत्रशोथ है जो वाइब्रियो कॉलेरी नामक जीवाणु के एंटेरोटॉक्सिन उतपन्न करने वाले उपभेदों के कारण होता है। मनुष्यों मे इसका संचरण इस जीवाणु द्वारा दूषित भोजन या पानी को खाने पीने  के माध्यम से होता है। आमतौर पर पानी या भोजन का यह दूषण हैजे के एक वर्तमान रोगी द्वारा ही होता है। अभी तक ऐसा माना जाता था कि हैजे का जलाशय स्वयं मानव होता है, लेकिन पर्याप्त सबूत है कि जलीय वातावरण भी इस जीवाणु के जलाशयों के रूप में काम कर सकते हैं।
इसके सबसे गंभीर रूप में रोग के लक्षणों की शुरुआत के एक घंटे के भीतर ही, एक स्वस्थ व्यक्ति का बलड़प्रेसर निम्न रक्तचाप के स्तर तक पहुँच सकता है और संक्रमित मरीज को अगर चिकित्सा प्रदान नहीं की जाये तो वो तीन घंटे के अन्दर मर सकता है। रोगी को पतले दस्त होते हैं और 4 से 12 घंटों में वह आघात की अवस्था मे पहुँच सकता है और अगर उसे मौखिक पुनर्जलीकरण चिकित्सा प्रदान नहीं की जाती तो, 18 घंटे के अंदर रोगी मार सकता है

एड्स 2005 से 2012 तक अपने 

चरम पे था 
एड्स होने के कई मुख्य कारण हो सकते है
जैसे अगर किसी महिला, या पुरुष   में से किसी एक को है  
और वो संबंध बनाते है एक दूसरे के साथ तो हो सकता है  अगर किसी को एड्स है उसका इस्तेमाल किया हुआ इंजेक्सन  ब्लेड  आदि से कोई दूसरा मनुष्य इस्तेमाल करे  तो उसको  एड्स हो सकता है 99% परसेंटेज चान्स  है होने के

एचआईवी एड्स (साल 2005 से 2012 के दौरान चरम पर)

मौत का आंकड़ा: 3.6 करोड़
कारण: एचआईवी

साल 1976 में इसकी शुरुआत अफ्रीकी देश कॉन्गो से हुई थी. बाद में यह पूरी दुनिया में फैल गया. साल 1976 के बाद इसने 3.6 करोड़ लोगों की जान ली थी. अभी करीब 3.1 से 3.5 करोड़ लोग एचआईवी संक्रमित हैं. ज्यादातर लोग अफ्रीकी देशों के हैं.

बढ़ती जागरूकता और इलाज की नई प्रणालियों के विकास ने एचआईवी को जड़ से खत्म तो नहीं किया है, मगर इसके रोकथाम के कई इलाज तैयार कर लिए हैं. साल 2005 से 2012 के दौरान इसका प्रभाव सबसे अधिक था. इस दौरान वार्षिक मौत का आंकड़ा 22 लाख से 16 लाख तक घटा है